05

अंधेरे की दुनिया

रात अभी खत्म नहीं हुई थी।

सड़क पर फिर से खामोशी फैल चुकी थी, लेकिन यह खामोशी पहले जैसी नहीं थी।

अब इसमें डर छुपा हुआ था।

रिया अभी भी वहीं खड़ी थी, उसकी उंगलियाँ अब भी आरव का हाथ पकड़े हुए थीं।

अभी कुछ मिनट पहले जो कुछ हुआ था, वह सब उसके दिमाग में घूम रहा था।

लाल आँखें…

अजीब जीव…

और वह रहस्यमयी परछाई।

रिया ने धीरे से कहा—

“आरव… क्या वो सच में वापस आएगा?”

आरव ने अंधेरे की तरफ देखते हुए जवाब दिया—

“हाँ।”

“इतनी जल्दी?”

“उसे जल्दी नहीं है।”

रिया चौंक गई।

“मतलब?”

आरव ने गहरी सांस ली।

“वह खेल खेलना पसंद करता है।”

रिया का दिल फिर से धड़कने लगा।

“मौत का खेल…”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“हाँ… वही।”

कुछ पल दोनों चुप रहे।

ठंडी हवा धीरे-धीरे चल रही थी।

रिया ने आसमान की तरफ देखा।

चाँद बादलों के पीछे छिप रहा था।

उसे अचानक महसूस हुआ कि उसकी जिंदगी कुछ घंटों में ही पूरी तरह बदल चुकी है।

वह धीरे से बोली—

“आरव… मुझे घर जाना चाहिए।”

आरव ने सिर हिलाया।

“हाँ।”

दोनों धीरे-धीरे वापस घर की तरफ चलने लगे।

लेकिन रिया के मन में अब भी हजारों सवाल थे।

कुछ कदम चलने के बाद उसने पूछा—

“आरव… तुम कब से मुझे देख रहे थे?”

आरव थोड़ी देर चुप रहा।

फिर बोला—

“काफी समय से।”

रिया रुक गई।

“काफी समय से… मतलब?”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“लगभग एक महीने से।”

रिया हैरान रह गई।

“एक महीना…?”

“हाँ।”

“लेकिन क्यों?”

आरव ने जवाब दिया—

“क्योंकि उसी दिन से वह तुम्हें ढूंढ रहा है।”

रिया का दिल धक से रह गया।

“कौन…?”

“वही… जो अभी आया था।”

रिया को अचानक याद आया—

“उसने कहा था कि मैं खास हूँ।”

आरव ने सिर झुका लिया।

“हाँ… तुम हो।”

“लेकिन क्यों?”

आरव ने सीधे जवाब नहीं दिया।

उसने बस कहा—

“अभी तुम्हें सब जानने की जरूरत नहीं है।”

रिया को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई।

“तुम फिर वही कर रहे हो।”

“क्या?”

“आधा सच बता रहे हो।”

आरव हल्का-सा मुस्कुराया।

“क्योंकि पूरा सच बहुत भारी होता है।”

रिया कुछ कहने ही वाली थी कि अचानक घर के अंदर से रोशनी जली।

रिया की माँ दरवाजे पर खड़ी थीं।

“रिया!”

रिया चौंक गई।

“माँ…”

“तुम इतनी देर बाहर क्या कर रही हो?”

रिया कुछ पल चुप रही।

वह समझ नहीं पा रही थी कि क्या जवाब दे।

आरव ने धीरे से कहा—

“मैं चलता हूँ।”

रिया ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।

“रुको।”

लेकिन आरव ने सिर हिलाया।

“अभी नहीं।”

“क्यों?”

“क्योंकि अगर तुम्हारी माँ मुझे देख लेंगी… तो बहुत सवाल होंगे।”

रिया ने धीरे से कहा—

“मुझे जवाब चाहिए।”

आरव ने उसकी आँखों में देखा।

“मैं वापस आऊँगा।”

“कब?”

“जल्द।”

यह कहकर वह धीरे-धीरे अंधेरे में गायब हो गया।

रिया कुछ सेकंड तक वहीं खड़ी रही।

फिर वह घर के अंदर चली गई।

अगली सुबह

सुबह की धूप कमरे में फैल चुकी थी।

लेकिन रिया की रात ठीक से नहीं बीती थी।

वह बार-बार उसी रात के बारे में सोचती रही।

उसने आईने में खुद को देखा।

उसकी आँखों के नीचे हल्के काले घेरे बन गए थे।

“क्या यह सब सच था…?”

वह खुद से बोली।

तभी उसका फोन वाइब्रेट हुआ।

रिया ने जल्दी से फोन उठाया।

स्क्रीन पर एक मैसेज था।

Unknown Number

मैसेज में लिखा था—

“क्या तुम ठीक हो?”

रिया का दिल तेजी से धड़कने लगा।

उसने तुरंत जवाब लिखा—

“आरव?”

कुछ सेकंड बाद जवाब आया—

“हाँ।”

रिया के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।

“तुम कहाँ हो?”

“पास ही।”

रिया ने तुरंत खिड़की से बाहर देखा।

लेकिन सड़क खाली थी।

“मुझे तुमसे बात करनी है।”

“मुझे भी।”

“कहाँ मिल सकते हैं?”

कुछ सेकंड बाद जवाब आया—

“कॉलेज के पीछे वाली पुरानी लाइब्रेरी।”

रिया चौंक गई।

वह जगह बहुत सुनसान थी।

“वहाँ क्यों?”

आरव ने लिखा—

“क्योंकि वहाँ कोई नहीं आता।”

रिया ने गहरी सांस ली।

“ठीक है।”

पुरानी लाइब्रेरी

दोपहर का समय था।

कॉलेज के पीछे वाली पुरानी लाइब्रेरी अब लगभग बंद हो चुकी थी।

उसके आसपास सिर्फ सूखे पत्ते और टूटी हुई खिड़कियाँ थीं।

रिया धीरे-धीरे वहाँ पहुँची।

उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था।

“आरव?”

उसने आवाज लगाई।

कुछ सेकंड तक कोई जवाब नहीं आया।

फिर अचानक पीछे से आवाज आई—

“तुम आ गई।”

रिया मुड़ी।

आरव वहीं खड़ा था।

आज वह थोड़ा अलग लग रहा था।

उसकी आँखों में अब भी वही रहस्यमयी गहराई थी।

रिया उसके पास आई।

“अब मुझे सच बताओ।”

आरव ने पूछा—

“कौन सा सच?”

रिया ने गुस्से में कहा—

“सब कुछ।”

आरव कुछ पल चुप रहा।

फिर उसने धीरे से कहा—

“ठीक है।”

रिया की धड़कन तेज हो गई।

आरव ने लाइब्रेरी की टूटी खिड़की की तरफ देखा।

फिर कहा—

“इस दुनिया में सिर्फ इंसान ही नहीं रहते।”

रिया ने कहा—

“यह बात तो मुझे अब समझ आ गई है।”

आरव हल्का मुस्कुराया।

“लेकिन असली बात यह है कि दो दुनिया हैं।”

“दो दुनिया?”

“एक… इंसानों की।”

“और दूसरी?”

आरव ने धीरे से कहा—

“अंधेरे की।”

रिया चुप रही।

आरव आगे बोला—

“सदियों पहले इन दोनों दुनियाओं के बीच एक दीवार थी।”

“दीवार?”

“हाँ… एक अदृश्य सीमा।”

“फिर क्या हुआ?”

आरव की आवाज गंभीर हो गई।

“वह सीमा टूट गई।”

रिया का दिल धड़कने लगा।

“कैसे?”

आरव ने कहा—

“किसी ने उसे तोड़ा।”

रिया ने धीरे से पूछा—

“क्यों?”

आरव ने जवाब दिया—

“ताकि अंधेरे की दुनिया इंसानों की दुनिया पर कब्जा कर सके।”

रिया के शरीर में डर दौड़ गया

“और वही जीव…?”

“हाँ… वही।”

रिया कुछ सेकंड तक चुप रही।

फिर उसने पूछा—

“और मैं इसमें कहाँ आती हूँ?”

आरव ने उसकी आँखों में देखा।

“तुम उस सीमा की कुंजी हो।”

रिया का दिल रुक सा गया।

“क्या?”

“अगर तुम्हारी शक्ति जाग गई… तो वह सीमा फिर से बन सकती है।”

रिया को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या सुन रही है।

“मेरे अंदर कोई शक्ति नहीं है।”

आरव ने कहा—

“अभी नहीं।”

“मतलब?”

“लेकिन बहुत जल्द होगी।”

रिया डर गई।

“और अगर वह शक्ति गलत हाथों में चली गई तो?”

आरव की आँखें गंभीर हो गईं।

“तो यह दुनिया खत्म हो सकती है।”

रिया चुप हो गई।

उसके मन में अब डर से ज्यादा सवाल थे।

“तो अब क्या होगा?”

आरव ने कहा—

“अब हमें तुम्हें तैयार करना होगा।”

“किस लिए?”

“उस लड़ाई के लिए… जो आने वाली है।”

रिया ने धीरे से पूछा—

“और अगर मैं हार गई तो?”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“तो अंधेरा जीत जाएगा।”

रिया का दिल भारी हो गया।

लेकिन उसी समय अचानक लाइब्रेरी के अंदर कोई आवाज आई।

दोनों तुरंत मुड़े।

किसी के कदमों की आवाज आ रही थी।

रिया फुसफुसाई—

“कोई और भी है यहाँ…”

आरव की आँखें अचानक तेज हो गईं।

“पीछे रहो।”

अगले ही पल लाइब्रेरी के अंदर से एक परछाई बाहर आई।

रिया का दिल धड़कने लगा।

लेकिन इस बार वह कोई अजीब जीव नहीं था।

वह एक लड़की थी।

करीब रिया की उम्र की।

उसकी आँखें भी गहरी थीं।

उसने मुस्कुराकर कहा—

“तो आखिरकार… मैं तुम्हें मिल ही गई।”

रिया हैरान रह गई।

“तुम कौन हो?”

लड़की ने कहा—

“मेरा नाम… नायरा है।”

आरव का चेहरा अचानक कठोर हो गया।

“तुम यहाँ क्या कर रही हो?”

नायरा मुस्कुराई।

“तुम्हारी मदद करने आई हूँ।”

रिया ने आरव की तरफ देखा।

“तुम इसे जानते हो?”

आरव ने धीरे से कहा—

“हाँ।”

“कौन है यह?”

आरव ने गंभीर आवाज में कहा—

“यह भी हमारी तरह है।”

रिया ने पूछा—

“मतलब… शैडो गार्डियन?”

नायरा हँसी।

“कुछ वैसा ही।”

फिर उसने रिया की तरफ देखकर कहा—

“लेकिन सच यह है कि तुम्हारी कहानी अभी शुरू हुई है।”

रिया ने धीरे से पूछा—

“और तुम्हारी?”

नायरा की मुस्कान रहस्यमयी हो गई।

“मेरी कहानी… बहुत पहले शुरू हो चुकी है।”

उसी समय हवा का एक तेज झोंका आया।

लाइब्रेरी की टूटी खिड़कियाँ जोर से हिलने लगीं।

आरव ने अचानक अंधेरे की तरफ देखा।

“वह फिर आ रहा है।”

रिया का दिल फिर से तेज़ धड़कने लगा।

“कौन?”

आरव ने कहा—

“वही… जो कल रात आया था।”

नायरा मुस्कुराई।

“अच्छा है।”

रिया चौंक गई।

“अच्छा है?”

नायरा ने कहा—

“क्योंकि अब खेल सच में शुरू होगा।”

रिया ने महसूस किया—

उसकी जिंदगी अब पूरी तरह बदल चुकी थी।

अब वह सिर्फ एक लड़की नहीं थी।

वह एक ऐसी कहानी का हिस्सा बन चुकी थी…

जहाँ अंधेरा और रोशनी आमने-सामने खड़े थे।

और यह लड़ाई अभी शुरू ही हुई थी।

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