04

अंधेरे का सच

रात की हवा और ठंडी हो चुकी थी।

सड़क के किनारे लगे पेड़ अजीब आवाज़ कर रहे थे।

रिया का दिल अभी भी तेज़ धड़क रहा था।

अभी कुछ देर पहले ही उसने अंधेरे में वह डरावनी हँसी सुनी थी।

वह घबराकर आरव के बिल्कुल पास आ गई।

“आरव… ये कौन है?”

रिया की आवाज़ कांप रही थी।

आरव की आँखें अंधेरे पर टिकी हुई थीं।

“मैंने तुम्हें कहा था ना… यह जगह सुरक्षित नहीं है।”

रिया ने डरते हुए कहा—

“लेकिन वो है कौन?”

आरव कुछ सेकंड तक चुप रहा, जैसे वह कुछ सोच रहा हो।

फिर उसने धीरे से कहा—

“अगर मैं तुम्हें सच बता दूँ… तो शायद तुम मुझ पर भरोसा ही न करो।”

रिया ने उसकी आँखों में देखा।

“कम से कम कोशिश तो करो।”

उसी समय अंधेरे में फिर से पत्तों के हिलने की आवाज़ आई।

रिया का दिल जैसे रुक गया।

अचानक अंधेरे में दो चमकती हुई आँखें दिखाई दीं।

रिया डर के मारे चीखने ही वाली थी कि आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“शांत रहो…”

उसके हाथ की पकड़ मज़बूत थी, लेकिन उसमें एक अजीब-सी गर्माहट भी थी।

रिया का डर थोड़ा कम हुआ।

“वो… वो क्या है?”

रिया ने फुसफुसाकर पूछा।

आरव ने धीमी आवाज़ में कहा—

“वह इंसान नहीं है…”

रिया की आँखें डर से फैल गईं।

“मतलब…?”

आरव ने जवाब देने से पहले चारों तरफ देखा।

फिर उसने धीरे से कहा—

“कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जो अंधेरे में ही रहती हैं… और आज रात उनमें से एक तुम्हारे पीछे आ गई है।”

रिया को अब सच में डर लगने लगा था।

“लेकिन क्यों…? मैंने क्या किया है?”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“क्योंकि तुम खास हो।”

रिया हैरान रह गई।

“खास…? किस तरह?”

आरव जवाब देने ही वाला था कि अचानक अंधेरे से कोई तेज़ी से उनकी तरफ दौड़ा।

आरव तुरंत रिया के सामने आकर खड़ा हो गया।

कुछ सेकंड तक सब कुछ शांत हो गया।

फिर अचानक वह चीज़ गायब हो गई।

रिया ने घबराकर पूछा—

“वो कहाँ गया?”

आरव ने गहरी सांस ली।

“अभी के लिए चला गया…”

रिया ने धीरे से पूछा—

“अभी के लिए…?”

आरव ने सिर हिलाया।

“हाँ… क्योंकि यह वापस आएगा।”

रिया का दिल एक पल के रुक ही गया

फिर रिया ने धीरे से पूछा—

“आरव… तुम मेरी इतनी मदद क्यों कर रहे हो?”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखों में एक गहरा राज छुपा हुआ था।

“क्योंकि…”

वह बोलते-बोलते रुक गया।

“क्योंकि क्या?”

आरव ने धीरे से कहा—

“क्योंकि अगर तुम्हें कुछ हो गया… तो शायद मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगा।”

रिया का दिल एक पल के लिए रुक सा गया।

वह समझ नहीं पा रही थी कि आरव ऐसा क्यों कह रहा है।

लेकिन उसके दिल में एक अजीब-सी भावना जाग रही थी।

डर के बीच भी उसे आरव के पास सुरक्षित महसूस हो रहा था।

लेकिन उसी समय अंधेरे में फिर से वही डरावनी हँसी गूँजी।

इस बार वह आवाज़ पहले से भी ज्यादा करीब थी।

रात पहले से भी ज्यादा खामोश हो चुकी थी।

सड़क पर फैली धुंध अब और गहरी हो गई थी। पेड़ों की टहनियाँ हवा के साथ हिल रही थीं और उनकी परछाइयाँ सड़क पर ऐसे फैल रही थीं जैसे कोई अदृश्य चीज़ रेंग रही हो।

रिया की नजरें अभी भी अंधेरे में चमकती उन लाल आँखों पर टिकी हुई थीं।

उसका दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था कि उसे खुद अपनी धड़कनें सुनाई दे रही थीं।

“आरव… ये… ये कितने हैं?”

रिया की आवाज़ कांप रही थी।

आरव की नजरें अब भी अंधेरे में ही थीं।

उसने धीमी आवाज़ में कहा—

“जितने हमें दिखाई दे रहे हैं… उससे कहीं ज्यादा।”

रिया का गला सूख गया।

“मतलब…?”

आरव ने बिना उसकी तरफ देखे कहा—

“यह सिर्फ शुरुआत है।”

अचानक अंधेरे में हलचल हुई।

लाल आँखों की कुछ जोड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी।

रिया का शरीर डर उठा।

“आरव… वो… वो हमारी तरफ आ रहे हैं।”

आरव ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।

“मेरे पीछे रहो।”

उसकी आवाज़ अब पहले से ज्यादा गंभीर थी।

अगले ही पल अंधेरे से एक परछाई बाहर आई।

अब वह साफ दिखाई दे रही थी।

वह कोई इंसान नहीं था।

उसका शरीर झुका हुआ था, हाथ लंबे थे और उसकी आँखें खून की तरह लाल चमक रही थीं।

रिया के मुँह से चीख निकलते-निकलते रह गई।

“ये… ये क्या है?”

आरव ने धीमी आवाज़ में कहा

“इन्हें नॉक्टस कहते हैं।”

“नॉक्टस…?”

“ये अंधेरे में रहने वाले जीव हैं। और आज रात ये तुम्हें ढूंढ रहे हैं।”

रिया की सांस रुक गई।

“मुझे…?”

आरव ने सिर हिलाया।

“हाँ।”

तभी अचानक वह जीव गुर्राया।

उसकी आवाज़ इतनी भयानक थी कि रिया के पैरों से जैसे ताकत ही खत्म हो गई।

आरव एक कदम आगे बढ़ा।

“पीछे हट जाओ।”

लेकिन वह जीव वहीं खड़ा रहा।

कुछ सेकंड तक सन्नाटा छाया रहा।

फिर अचानक वह जीव तेजी से उनकी तरफ दौड़ा।

“रिया पीछे!”

आरव चिल्लाया।

लेकिन इससे पहले कि वह जीव रिया तक पहुँचता—

आरव की आँखों में अचानक एक अजीब-सी चमक आ गई।

उसका चेहरा बदलने लगा।

रिया ने हैरानी से देखा।

“आरव…?”

अगले ही पल वह जीव अचानक हवा में उछलकर पीछे जा गिरा।

जैसे किसी अदृश्य ताकत ने उसे धक्का दिया हो।

रिया स्तब्ध रह गई।

“ये… ये कैसे हुआ?”

आरव ने गहरी सांस ली।

“मैंने कहा था ना… मैं इस अंधेरे का हिस्सा हूँ।”

रिया अब समझ नहीं पा रही थी कि क्या हो रहा है।

“मतलब…?”

आरव कुछ पल चुप रहा।

फिर उसने धीरे से कहा—

“मैं इंसान नहीं हूँ।”

रिया की आँखें फैल गईं।

“क्या…?”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखों में अब भी वही गहरी चमक थी।

“मैं शैडो गार्डियन हूँ।”

रिया कुछ सेकंड तक कुछ बोल ही नहीं पाई।

“शैडो… गार्डियन?”

आरव ने सिर हिलाया।

“हम वो लोग हैं जो इंसानों की दुनिया को इन अंधेरे जीवों से बचाते हैं।”

रिया को यकीन नहीं हो रहा था।

“तो… तुम शुरुआत से ही जानते थे कि ये सब होगा?”

“हाँ।”

“और तुम मुझे इसलिए बचा रहे हो…?”

आरव कुछ पल चुप रहा।

फिर उसने धीरे से कहा—

“क्योंकि तुम इनके लिए खास हो।”

रिया का दिल धक से रह गया।

“खास… क्यों?”

आरव जवाब देने ही वाला था कि अचानक अंधेरे में फिर वही डरावनी हँसी गूँज उठी।

लेकिन इस बार वह हँसी पहले से भी ज्यादा खतरनाक थी।

रिया का शरीर कांप गया।

“ये… ये कौन है?”

आरव का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।

“वह आ गया।”

अंधेरे में से धीरे-धीरे एक लंबी परछाई बाहर आई।

उसकी आँखें बाकी जीवों से भी ज्यादा चमक रही थीं।

रिया के शरीर में ठंड दौड़ गई।

“ये…?”

आरव ने धीरे से कहा—

“यह उनका नेता है।”

वह परछाई धीरे-धीरे आगे बढ़ी।

फिर अचानक उसने हँसते हुए कहा—

“तो आखिरकार… मैं तुम्हें ढूंढ ही लाया।”

उसकी आवाज़ अजीब और डरावनी थी।

रिया ने घबराकर पूछा—

“तुम… कौन हो?”

वह परछाई मुस्कुराई।

“तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन।”

आरव तुरंत उसके सामने आ गया।

“रिया पीछे हटो।”

वह परछाई हँसी।

“तुम अभी भी उसे बचाने की कोशिश कर रहे हो, आरव?”

रिया चौंक गई।

“तुम… आरव को जानते हो?”

वह परछाई धीरे-धीरे करीब आई।

“हम बहुत पुराने दुश्मन हैं।”

आरव ने दाँत भींच लिए।

“यहाँ से चले जाओ।”

वह परछाई हँसी।

“इतनी आसानी से नहीं।”

उसने रिया की तरफ देखा।

“तुम्हें पता भी है कि तुम कितनी खास हो?”

रिया का दिल तेजी से धड़कने लगा।

“क्या मतलब?”

वह परछाई मुस्कुराई।

“तुम वह हो… जिसकी वजह से हमारी दुनिया बदल सकती है।”

रिया समझ नहीं पा रही थी।

“मैं…?”

आरव चिल्लाया—

“उसकी बात मत सुनो!”

लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।

वह परछाई अचानक हवा में गायब हो गई।

और अगले ही पल वह रिया के बिल्कुल सामने खड़ा था।

रिया चीख पड़ी।

लेकिन तभी—

आरव बिजली की तरह आगे बढ़ा।

दोनों के बीच जोरदार टक्कर हुई।

एक तेज़ रोशनी फैल गई।

रिया जमीन पर गिर गई।

जब उसने सिर उठाया—

तो उसने देखा कि आरव और वह परछाई एक-दूसरे से लड़ रहे थे।

यह लड़ाई इंसानों जैसी नहीं थी।

उनकी गति इतनी तेज़ थी कि रिया को सिर्फ परछाइयाँ ही दिखाई दे रही थीं।

अचानक वह परछाई जोर से हँसी।

“तुम उसे हमेशा नहीं बचा सकते।”

फिर उसने रिया की तरफ देखकर कहा—

“हम फिर मिलेंगे।”

अगले ही पल वह अंधेरे में गायब हो गया।

बाकी लाल आँखें भी धीरे-धीरे गायब होने लगीं।

सड़क पर फिर से सन्नाटा छा गया।

रिया धीरे-धीरे उठी।

उसकी नजर आरव पर गई।

वह जमीन पर घुटनों के बल बैठा था।

“आरव!”

रिया तुरंत उसके पास दौड़ी।

“तुम ठीक हो?”

आरव ने हल्की मुस्कान दी।

“हाँ… अभी।”

रिया की आँखों में आँसू आ गए।

“ये सब… मेरे कारण हो रहा है ना?”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“हाँ।”

रिया का दिल टूट गया।

“तो फिर तुम मेरी मदद क्यों कर रहे हो?”

आरव कुछ सेकंड तक चुप रहा।

फिर उसने धीरे से कहा—

“क्योंकि… मैं तुम्हें मरने नहीं दूँगा।”

रिया ने उसकी आँखों में देखा।

उसकी आवाज़ कांप रही थी।

“लेकिन क्यों…?”

आरव ने नजरें झुका लीं।

फिर उसने बहुत धीरे कहा—

“क्योंकि… मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ।”

रिया का दिल जैसे रुक गया।

उसने कभी सोचा भी नहीं था कि इतनी खतरनाक रात में कोई ऐसा सच सामने आएगा।

कुछ सेकंड तक दोनों चुप रहे।

हवा फिर से चलने लगी।

रिया ने धीरे से कहा—

“आरव… अगर यह सब सच है… तो अब क्या होगा?”

आरव ने आसमान की तरफ देखा।

“अब असली लड़ाई शुरू होगी।”

“किसके साथ?”

आरव ने गंभीर आवाज़ में कहा—

“अंधेरे की दुनिया के साथ।”

रिया का दिल फिर से धड़कने लगा।

“और अगर हम हार गए तो?”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखों में अब डर नहीं था।

“तो शायद यह दुनिया हमेशा के लिए बदल जाएगी।”

रिया ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।

“तो फिर… हमें हारना नहीं चाहिए।”

आरव मुस्कुराया।

“अब तुम सच में इस कहानी का हिस्सा बन चुकी हो।”

रिया ने अंधेरे की तरफ देखा।

उसे पता था—

यह सिर्फ शुरुआत थी।

अभी बहुत कुछ बाकी था।

अंधेरा अभी खत्म नहीं हुआ था।

और कहीं दूर…

कोई उन्हें देख रहा था।

और मुस्कुरा रहा था।

क्योंकि असली खेल अभी शुरू हुआ था।

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