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Title: खौफ की नई परछाई

रिया ने खिड़की के पर्दे के पीछे से उस लड़के को देखने की कोशिश की। वह अब भी सड़क के बीचों-बीच खड़ा था, लेकिन उसकी नजरें किसी और पर थीं। रिया की धड़कन गति पकड़ने लगी, जैसे उसे एक नयी अंधेरी दुनिया में धकेल दिया गया हो।

"क्या वो कोई और है?" उसने खुद से पूछा।

उसने अपने फोन को फिर से चेक किया। स्क्रीन पर एक नया मैसेज आया था।

“उसे देखो।”

रिया ने घबराकर फिर से बाहर झाँका। लेकिन अब वह लड़का कहीं नहीं था। सड़क पर सिर्फ ठंडी हवा का झोंका था।

उसने गहरी सांस ली और फिर से फोन उठाया।

“तुम कौन हो?” उसने टाइप किया।

इस बार जवाब आने में कुछ समय लगा। रिया की नजरें खिड़की से हटकर कमरे के अंधेरे कोने में चली गईं। उसे ऐसा लगा जैसे कोई उसे देख रहा है।

अचानक फोन की स्क्रीन पर लिखा आया—

“मैं वही हूँ, जो तुम्हें बचाने आया हूँ। उस लड़के से दूर रहो। वह तुम्हारे लिए खतरा है।”

रिया के दिल में डर और जिज्ञासा दोनों ने जगह बना ली।

“क्यों? वह मुझे क्यों खतरा है?” उसने फिर से टाइप किया।

तभी, अचानक दरवाजे पर दस्तक हुई। रिया ने चौंककर दरवाजे की तरफ देखा।

“रिया! क्या तुम अंदर हो?” उसकी माँ की आवाज आई।

“हाँ, माँ! बस एक मिनट!” उसने जल्दी से जवाब दिया और फिर से फोन की तरफ देखा।

दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

“क्या तुम यहाँ आ सकते हो?” उसने फिर लिखा।

कुछ पल बीते, फिर एक नया मैसेज आया—

“तुम्हें अकेले नहीं रहना चाहिए। दरवाजे को मत खोलना। वह अंदर आ सकता है।”

रिया की सांसें तेज हो गईं। अब उसे उस लड़के के बारे में और जानने की जरूरत महसूस हुई। उसने हिम्मत जुटाकर फिर से लिखा—

“तुम कौन हो?”

इस बार जवाब आने में काफी समय लगा। वह दरवाजे के पास चली गई, जहां उसकी माँ अब भी दस्तक दे रही थी।

“रिया, दरवाजा खोलो!” उसकी माँ की आवाज में चिंता थी।

“माँ, मैं अभी नहीं आ सकती!” उसने कहा।

तभी, फोन पर एक नया मैसेज आया—

“उससे दूर रहो। मैं तुम्हें बचाने के लिए यहाँ हूँ। जल्द ही सब कुछ साफ हो जाएगा।”

रिया ने डर के मारे अपने हाथों को कस लिया।

“तुम कौन हो? मुझे सच बताओ!” उसने फिर से लिखा।

इस बार, मैसेज का जवाब नहीं आया।

“रिया!” उसकी माँ ने फिर से आवाज दी। “क्या सब ठीक है?”

“हाँ, माँ! सब ठीक है!” उसने छिपी हुई आवाज में कहा।

उसकी माँ की आवाज में अब और भी चिंता थी। “तुम्हें कुछ चाहिए तो मुझे बताओ। मैं तुम्हारे लिए आ सकती हूँ।”

रिया ने सोचा कि अगर वह दरवाजा खोलेगी तो क्या होगा? क्या वह लड़का सच में खतरा था, या फिर उसकी माँ को खतरा था?

उसी समय, उसके फोन पर फिर से एक मैसेज आया—

“मैं तुम्हारे साथ हूँ। बाहर जाओ, और उस लड़के से बात करो। सब कुछ ठीक हो जाएगा।”

“क्या? मैं कैसे जा सकती हूँ?” रिया ने खुद से कहा।

उसने अपनी माँ की तरफ देखा। “माँ, क्या मैं बाहर जा सकती हूँ?”

“बाहर? इस समय?” उसकी माँ ने आश्चर्य से पूछा।

“हाँ, मुझे कुछ जरूरी काम है।”

“ठीक है, लेकिन जल्दी आना। मैं चिंतित हूँ।”

रिया ने एक गहरी सांस ली और दरवाजा खोला।

जैसे ही दरवाजा खुला, उसकी माँ ने देखा कि रिया का चेहरा सफेद था।

“क्या हुआ?” उसकी माँ ने पूछा।

“कुछ नहीं, माँ। मुझे बस बाहर जाना है।” रिया ने कहा और बाहर निकल गई।

सड़क पर, उसे वही लड़का नजर आया, लेकिन इस बार वह अंधेरे में नहीं था। वह एक पेड़ के नीचे खड़ा था, उसकी आँखों में एक गहरी चमक थी।

“तुमने मुझे बुलाया?” उसने कहा।

रिया ने डरते-डरते कहा, “तुम्हारे बारे में मुझे सब कुछ जानना है। तुम कौन हो?”

“मैं तुम्हें बचाने आया हूँ, रिया। लेकिन तुम्हें मुझे विश्वास करना होगा।”

उसकी बात सुनकर रिया का दिल तेजी से धड़कने लगा।

“बचाने के लिए? लेकिन तुम तो मुझे डराते रहे हो।”

“मैं जानता हूँ। लेकिन असली खतरा अभी आना बाकी है। तुम्हें मेरी मदद चाहिए।”

रिया ने देखा कि उसके पीछे एक अंधेरा साया धीरे-धीरे बढ़ रहा था।

“क्या वह है?” रिया ने पूछा।

“हाँ, और वह तुम्हें खोज रहा है। अब तुम्हें मेरे साथ चलना होगा। तुम्हारी सुरक्षा के लिए।”

रिया ने घबराकर कहा, “लेकिन मैं… मैं नहीं जानती तुम कौन हो!”

“तुम्हें जानने की जरूरत नहीं है। बस मेरी बात मानो। चलो!”

और इसी के साथ, रिया ने एक ऐसा कदम उठाया, जो उसकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदलने वाला था। अब उसे खौफ के साथ-साथ एक नई कहानी का सामना करना था, जो अभी शुरू हुई थी।

असली खौफ अभी बाकी था।

आरव का सबसे बड़ा राज सामने आएगा

और रिया को पता चलेगा कि वह किस दुनिया में फँस चुकी है।

रिया की आँखें उन लाल चमकती आँखों पर ही टिकी रह गईं।

अंधेरे में जैसे कई परछाइयाँ धीरे-धीरे हिल रही थीं।

रिया का गला सूख गया।

“आरव… ये कितने हैं…?”

उसने बहुत धीमी आवाज़ में पूछा।

आरव की नजरें अभी भी अंधेरे पर थीं।

“जितने हमें दिखाई दे रहे हैं… उससे कहीं ज़्यादा।”

रिया का दिल जोर से धड़कने लगा।

“तो अब क्या करें…?”

आरव ने तुरंत उसका हाथ पकड़ा।

“मेरे साथ चलो… अभी।”

दोनों तेजी से सड़क की दूसरी तरफ बढ़ने लगे।

रिया बार-बार पीछे मुड़कर देख रही थी।

अंधेरे में वे लाल आँखें अब भी उनका पीछा कर रही थीं।

जैसे कोई शिकार को घूरता है।

ठंडी हवा अचानक और तेज़ चलने लगी।

पेड़ों की टहनियाँ आपस में टकराने लगीं।

रिया का डर हर कदम के साथ बढ़ता जा रहा था।

“आरव… अगर वो हमारे पीछे आ गए तो…?”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“तब मैं उन्हें रोक लूँगा।”

रिया ने तुरंत पूछा—

“और अगर तुम नहीं रोक पाए तो?”

आरव कुछ सेकंड के लिए चुप हो गया।

फिर उसने धीमी आवाज़ में कहा—

“तो शायद आज रात बहुत कुछ बदल जाएगा।”

रिया को यह जवाब बिल्कुल अच्छा नहीं लगा।

“तुम हमेशा आधा सच क्यों बोलते हो?”

आरव रुक गया।

दोनों सड़क के किनारे खड़े थे।

हल्की चाँदनी उनके चेहरों पर पड़ रही थी।

आरव ने पहली बार रिया की आँखों में सीधे देखा।

“क्योंकि पूरा सच बहुत खतरनाक है।”

रिया ने धीरे से कहा—

“लेकिन मैं डरना बंद करना चाहती हूँ।”

आरव की आँखों में हल्की-सी मुस्कान आई।

“डरना बुरा नहीं होता… डर हमें ज़िंदा रखता है।”

रिया ने गहरी सांस ली।

“तो फिर तुम क्यों नहीं डरते?”

आरव कुछ पल चुप रहा।

फिर उसने धीरे से कहा—

“क्योंकि मैं इस अंधेरे का हिस्सा हूँ।”

रिया चौंक गई।

“क्या मतलब…?”

लेकिन उसी समय अचानक पीछे से तेज़ कदमों की आवाज़ आई।

दोनों तुरंत मुड़े।

अंधेरे में से एक परछाई तेजी से उनकी तरफ बढ़ रही थी।

रिया का दिल जैसे रुक गया।

“आरव… वो आ गया…”

आरव तुरंत उसके सामने आकर खड़ा हो गया।

उसकी आँखें अचानक बहुत गंभीर हो गईं।

“पीछे रहो।”

परछाई अब बिल्कुल करीब आ चुकी थी।

चाँद की हल्की रोशनी में उसका चेहरा थोड़ा-सा दिखाई दिया।

लेकिन वह चेहरा इंसान जैसा नहीं लग रहा था।

रिया की सांसें तेज़ हो गईं।

“ये… ये क्या है…?”

आरव ने धीरे से कहा—

“यह वही है… जिससे मैं तुम्हें बचा रहा हूँ।”

अचानक वह परछाई जोर से गुर्राई।

उसकी आवाज़ सुनकर रिया के पूरे शरीर में डर दौड़ गया।

आरव ने एक कदम आगे बढ़ाया।

“पीछे हट जाओ।”

लेकिन वह चीज़ वहीं खड़ी रही।

कुछ सेकंड तक सब कुछ बिल्कुल शांत हो गया।

सिर्फ हवा की आवाज़ सुनाई दे रही थी।

फिर अचानक वह परछाई पीछे हट गई।

और अगले ही पल अंधेरे में गायब हो गई।

रिया ने हैरान होकर पूछा—

“ये… चला गया?”

आरव ने गहरी सांस ली।

“अभी के लिए।”

रिया ने धीरे से कहा—

“मुझे लगता है मैं सपना देख रही हूँ…”

आरव ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—

“काश यह सपना ही होता।”

रिया कुछ पल चुप रही।

फिर उसने धीरे से पूछा—

“आरव… क्या तुम हमेशा मेरे साथ रहोगे?”

यह सवाल सुनकर आरव थोड़ी देर तक उसे देखता रहा।

उसकी आँखों में एक अजीब-सी उदासी थी।

“मैं कोशिश करूँगा…”

रिया ने तुरंत पूछा—

“कोशिश…? मतलब?”

आरव ने आसमान की तरफ देखा।

“क्योंकि हर कहानी का अंत हमेशा खुश नहीं होता।”

रिया को यह सुनकर अच्छा नहीं लगा।

उसने धीरे से कहा—

“लेकिन मुझे लगता है… हमारी कहानी अलग होगी।”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

कुछ सेकंड तक दोनों की नजरें एक-दूसरे से जुड़ी रहीं।

उस पल रिया का डर थोड़ा कम हो गया।

उसे पहली बार लगा कि शायद वह आरव पर भरोसा कर सकती है।

लेकिन उसी समय…

अंधेरे में फिर से वही डरावनी हँसी गूँज उठी।

इस बार वह आवाज़ पहले से भी ज्यादा करीब थी।

रिया का दिल जोर से धड़कने लगा।

आरव का चेहरा अचानक सख्त हो गया।

“रिया…”

“हाँ…?”

“अब हमें सच में भागना होगा।”

रिया ने घबराकर पूछा—

“क्यों?”

आरव ने अंधेरे की तरफ देखते हुए कहा—

“क्योंकि इस बार… वह हमें छोड़ने वाला नहीं है।”

रिया ने धीरे-धीरे पीछे देखा।

और अगले ही पल उसके चेहरे का रंग उड़ गया।

अंधेरे में अब सिर्फ एक नहीं…

दर्जनों लाल आँखें चमक रही थीं।

रिया की सांस रुक गई।

अब उसे समझ आ गया था—

यह सिर्फ डर की शुरुआत थी।

और शायद…

आज की रात उसकी ज़िंदगी की सबसे खौफनाक रात बनने वाली थी।

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