02

साए में छुपा चहरा

रात अभी भी गहरी थी।

रिया की आँखें खिड़की के बाहर ही टिकी हुई थीं।

सड़क पर हल्की धुंध फैल चुकी थी और दूर खड़ा वह काले कपड़ों वाला लड़का अभी भी वहीं था।

लेकिन इस बार उसकी नजरें रिया पर नहीं थीं।

वह घर के पीछे अंधेरे में कुछ देख रहा था… जैसे वहाँ कोई और भी मौजूद हो।

रिया का दिल तेजी से धड़कने लगा।

“वो आखिर देख क्या रहा है…?”

रिया ने खुद से कहा।

जिज्ञासा डर से थोड़ी ज्यादा हो चुकी थी।

रिया धीरे-धीरे सीढ़ियाँ उतरकर नीचे आई।

घर में सब सो चुके थे।

दरवाज़ा खोलने से पहले उसने एक पल के लिए सोचा—

“क्या मुझे बाहर जाना चाहिए…?”

लेकिन उसके मन में एक अजीब-सी बेचैनी थी।

जैसे अगर वह अभी बाहर नहीं गई… तो शायद कोई बड़ा सच उससे छूट जाएगा।

रिया ने हिम्मत की और धीरे से दरवाज़ा खोल दिया।

ठंडी हवा का झोंका उसके चेहरे से टकराया।

सड़क पर हल्की पीली रोशनी जल रही थी।

रिया धीरे-धीरे बाहर आई।

उसकी नजर सीधे उस लड़के पर गई।

जैसे ही रिया उसके करीब पहुँची… वह लड़का अचानक उसकी तरफ मुड़ गया।

रिया की साँस रुक गई।

पहली बार उसने उसका चेहरा साफ देखा।

उसकी आँखें गहरी थीं… और उनमें अजीब-सी उदासी थी।

कुछ पल दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।

फिर रिया ने हिम्मत करके पूछा—

“तुम कौन हो…?”

लड़का कुछ सेकंड तक चुप रहा।

फिर उसने धीरे से कहा—

“तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था।”

रिया थोड़ी नाराज़ हो गई।

“पहले तुम मुझे डराते हो, फिर कहते हो यहाँ मत आओ… आखिर चाहते क्या हो?”

लड़के ने गहरी सांस ली।

“मैं तुम्हें डराना नहीं चाहता… मैं तुम्हें बचाना चाहता हूँ।”

रिया को वही मैसेज याद आ गया।

“किससे बचाना चाहते हो?”

लड़के की नजर अचानक रिया के घर के पीछे अंधेरे में चली गई।

उसने धीमी आवाज में कहा—

“उससे…”

रिया ने पीछे मुड़कर देखा।

लेकिन वहाँ सिर्फ अंधेरा था।

“वहाँ तो कोई नहीं है।”

लड़के के चेहरे पर गहराई आ गई।

“तुम्हें अभी नहीं दिखेगा।”

रिया को अब थोड़ा गुस्सा आने लगा।

“देखो, अगर तुम मज़ाक कर रहे हो तो ये बिल्कुल भी funny नहीं है।”

लड़के ने उसकी बात का जवाब नहीं दिया।

उसने बस एक सवाल पूछा—

“रिया… क्या तुम्हें पिछले कुछ दिनों से कुछ अजीब महसूस हुआ है?”

रिया हैरान रह गई।

“तुम्हें मेरा नाम कैसे पता?”

लड़का कुछ पल चुप रहा।

फिर बोला—

“मैं तुम्हारे बारे में बहुत कुछ जानता हूँ।”

रिया को यह सुनकर थोड़ा डर लगा।

“लेकिन क्यों…?”

लड़का जवाब देने ही वाला था कि अचानक पीछे से पत्तों के हिलने की आवाज आई।

दोनों तुरंत उस दिशा में देखने लगे।

कुछ सेकंड तक सन्नाटा रहा।

फिर अचानक अंधेरे में कुछ तेजी से हिला।

रिया डर के मारे लड़के के थोड़ा पास आ गई।

“वो… वो क्या था?”

लड़के ने धीरे से कहा—

“यही वो चीज है जिससे मैं तुम्हें बचाना चाहता हूँ।”

रिया का दिल और तेज धड़कने लगा।

“लेकिन है क्या वो…?”

लड़के ने सीधे जवाब नहीं दिया।

उसने सिर्फ इतना कहा—

“अगर तुम्हें अपनी जिंदगी प्यारी है… तो आज के बाद रात में अकेले बाहर मत निकलना।”

रिया अब और उलझ गई थी।

“लेकिन तुम हो कौन?”

कुछ सेकंड की चुप्पी के बाद लड़के ने कहा—

“मेरा नाम… आरव है।”

रिया ने पहली बार उसका नाम सुना।

“और तुम यहाँ क्यों आए हो, आरव?”

आरव की नजर फिर अंधेरे की तरफ चली गई।

“क्योंकि तुम्हारी जिंदगी खतरे में है।”

रिया अब सच में डर गई।

“कौन सा खतरा?”

आरव जवाब देने ही वाला था कि अचानक रिया का फोन बज उठा।

रिया ने फोन देखा।

स्क्रीन पर Unknown Number लिखा था।

उसने डरते हुए कॉल उठाई।

लेकिन फोन के दूसरी तरफ कोई आवाज नहीं थी।

सिर्फ हल्की साँसों की आवाज आ रही थी।

रिया ने घबराकर कहा—

“हेलो… कौन है?”

कुछ सेकंड बाद फोन के दूसरी तरफ से एक धीमी आवाज आई—

“रिया…”

रिया के हाथ काँपने लगे।

यह आवाज आरव की नहीं थी।

वह किसी और की थी।

फोन कट गया।

रिया ने डरकर आरव की तरफ देखा।

“तुमने सुना…?”

आरव का चेहरा गंभीर हो गया।

“हाँ।”

रिया ने धीरे से पूछा—

“ये कौन था…?”

आरव ने जवाब देने से पहले चारों तरफ देखा।

फिर धीमी आवाज में बोला—

“अब खेल शुरू हो चुका है।”

रिया समझ नहीं पा रही थी कि क्या हो रहा है।

“कौन सा खेल?”

आरव ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—

“मौत का खेल।”

रिया के पैरों तले जमीन खिसक गई।

“तुम मजाक कर रहे हो ना…?”

आरव ने सिर हिलाया।

“काश मैं मजाक कर रहा होता।”

उसी समय अचानक घर के पीछे अंधेरे में किसी के हंसने की आवाज गूँजी।

वह आवाज इतनी डरावनी थी कि रिया के शरीर में ठंड दौड़ गई।

रिया तुरंत आरव के पास आ गई।

“ये… ये कौन है?”

आरव ने धीरे से कहा—

“जिससे मैंने कहा था कि तुम्हें बचाना है।”

रिया की सांसें तेज हो गईं।

अंधेरे में कुछ हलचल फिर से हुई।

लेकिन इस बार वह चीज धीरे-धीरे रिया के घर की तरफ बढ़ रही थी।

रिया को अब समझ आ गया था—

यह कहानी सिर्फ रहस्य की नहीं थी…

यह खौफ की शुरुआत थी।

और शायद…

अब उसकी जिंदगी कभी पहले जैसी नहीं रहने वाली थी।

“और तभी अंधेरे में किसी की धीमी हँसी गूँजी… रिया ने पीछे मुड़कर देखा—और उसकी साँस वहीं रुक गई।”

रात की हवा और ठंडी हो चुकी थी।

सड़क के किनारे लगे पेड़ अजीब आवाज़ कर रहे थे।

रिया का दिल अभी भी तेज़ धड़क रहा था।

अभी कुछ देर पहले ही उसने अंधेरे में वह डरावनी हँसी सुनी थी।

वह घबराकर आरव के बिल्कुल पास आ गई।

“आरव… ये कौन है?”

रिया की आवाज़ कांप रही थी।

आरव की आँखें अंधेरे पर टिकी हुई थीं।

“मैंने तुम्हें कहा था ना… यह जगह सुरक्षित नहीं है।”

रिया ने डरते हुए कहा—

“लेकिन वो है कौन?”

आरव कुछ सेकंड तक चुप रहा, जैसे वह कुछ सोच रहा हो।

फिर उसने धीरे से कहा—

“अगर मैं तुम्हें सच बता दूँ… तो शायद तुम मुझ पर भरोसा ही न करो।”

रिया ने उसकी आँखों में देखा।

“कम से कम कोशिश तो करो।”

उसी समय अंधेरे में फिर से पत्तों के हिलने की आवाज़ आई।

रिया का दिल जैसे रुक गया।

अचानक अंधेरे में दो चमकती हुई आँखें दिखाई दीं।

रिया डर के मारे चीखने ही वाली थी कि आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“शांत रहो…”

उसके हाथ की पकड़ मज़बूत थी, लेकिन उसमें एक अजीब-सी गर्माहट भी थी।

रिया का डर थोड़ा कम हुआ।

“वो… वो क्या है?”

रिया ने फुसफुसाकर पूछा।

आरव ने धीमी आवाज़ में कहा—

“वह इंसान नहीं है…”

रिया की आँखें डर से फैल गईं।

“मतलब…?”

आरव ने जवाब देने से पहले चारों तरफ देखा।

फिर उसने धीरे से कहा—

“कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जो अंधेरे में ही रहती हैं… और आज रात उनमें से एक तुम्हारे पीछे आ गई है।”

रिया को अब सच में डर लगने लगा था।

“लेकिन क्यों…? मैंने क्या किया है?”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“क्योंकि तुम खास हो।”

रिया हैरान रह गई।

“खास…? किस तरह?”

आरव जवाब देने ही वाला था कि अचानक अंधेरे से कोई तेज़ी से उनकी तरफ दौड़ा।

आरव तुरंत रिया के सामने आकर खड़ा हो गया।

कुछ सेकंड तक सब कुछ शांत हो गया।

फिर अचानक वह चीज़ गायब हो गई।

रिया ने घबराकर पूछा—

“वो कहाँ गया?”

आरव ने गहरी सांस ली।

“अभी के लिए चला गया…”

रिया ने धीरे से पूछा—

“अभी के लिए…?”

आरव ने सिर हिलाया।

“हाँ… क्योंकि यह वापस आएगा।”

रिया का दिल फिर से तेज़ धड़कने लगा।

“और तब क्या होगा?”

आरव कुछ पल चुप रहा।

फिर उसने धीरे से कहा—

“तब शायद मैं तुम्हें बचा भी न पाऊँ।”

रिया ने पहली बार आरव की आँखों में डर देखा।

लेकिन उसी डर के बीच कुछ और भी था…

मोहब्बत की एक हल्की-सी झलक।

कुछ सेकंड तक दोनों चुप खड़े रहे।

फिर रिया ने धीरे से पूछा—

“आरव… तुम मेरी इतनी मदद क्यों कर रहे हो?”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखों में एक गहरा राज छुपा हुआ था।

“क्योंकि…”

वह बोलते-बोलते रुक गया।

“क्योंकि क्या?”

आरव ने धीरे से कहा—

“क्योंकि अगर तुम्हें कुछ हो गया… तो शायद मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगा।”

रिया का दिल एक पल के लिए रुक सा गया।

वह समझ नहीं पा रही थी कि आरव ऐसा क्यों कह रहा है।

लेकिन उसके दिल में एक अजीब-सी भावना जाग रही थी।

डर के बीच भी उसे आरव के पास सुरक्षित महसूस हो रहा था।

लेकिन उसी समय अंधेरे में फिर से वही डरावनी हँसी गूँजी।

इस बार वह आवाज़ पहले से भी ज्यादा करीब थी।

रिया ने डरकर आरव का हाथ कसकर पकड़ लिया।

आरव की आँखें अचानक गंभीर हो गईं।

“रिया…”

“हाँ…?”

“अब हमें यहाँ से जाना होगा… अभी।”

“क्यों?”

आरव ने अंधेरे की तरफ देखते हुए कहा—

“क्योंकि इस बार… वह अकेला नहीं है।”

रिया का दिल जैसे रुक गया।

“मतलब…?”

अंधेरे में अचानक कई जोड़ी लाल आँखें चमक उठीं।

रिया के शरीर में सिहरन दौड़ गई।

अब उसे समझ आ गया था—

यह सिर्फ एक रहस्य नहीं था…

यह एक खौफनाक दुनिया की शुरुआत थी।

और शायद…

अब उसकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली थी।

Write a comment ...

Write a comment ...