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Khauf ki pehli aahat

रात के लगभग 11 बजे थे।

शहर की सड़कों पर अजीब-सी खामोशी छाई हुई थी। हल्की ठंडी हवा चल रही थी और आसमान में बादल ऐसे घूम रहे थे जैसे कोई राज छुपा रहे हों।

रिया अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ी थी।

उसकी आँखें बाहर सड़क की तरफ देख रही थीं, लेकिन उसका मन कहीं और ही खोया हुआ था।

आज का दिन उसके लिए थोड़ा अजीब था।

सुबह जब वह कॉलेज जा रही थी, तब उसने महसूस किया था कि कोई उसे देख रहा है।

पहले तो उसने सोचा कि शायद उसका वहम है। लेकिन जब उसने पीछे मुड़कर देखा, तो सड़क के उस पार एक काले कपड़ों में खड़ा लड़का उसे ध्यान से देख रहा था।

उसकी आँखें बहुत गहरी थीं…

और उनमें कुछ ऐसा था जिससे रिया को अजीब-सा डर महसूस हुआ।

रिया ने जल्दी से नजरें हटा लीं और कॉलेज के अंदर चली गई।

लेकिन पूरे दिन उसे वही चेहरा याद आता रहा।

“कौन था वो…?”

रिया ने धीरे से खुद से पूछा।

कमरे में अचानक हवा का तेज झोंका आया और खिड़की अपने-आप जोर से बंद हो गई।

धड़ाम!

रिया चौंक गई।

उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।

“ये खिड़की अपने-आप कैसे बंद हो गई…?”

उसने धीरे से कहा।

कमरे में एक अजीब-सी खामोशी फैल गई।

तभी उसका फोन बज उठा।

रिया ने फोन उठाया।

लेकिन स्क्रीन पर कोई नंबर नहीं था।

सिर्फ एक मैसेज लिखा था—

“तुम्हें मुझसे दूर रहना चाहिए…”

रिया के हाथ कांपने लगे।

“ये किसने भेजा…?”

उसने डरते हुए सोचा।

अचानक उसे सुबह वाला लड़का याद आ गया।

क्या वही था…?

लेकिन उसे उसका नंबर कैसे मिला?

रिया के मन में हजारों सवाल घूमने लगे।

उसी समय नीचे से उसकी माँ की आवाज आई—

“रिया, खाना खा लो!”

रिया ने जल्दी से फोन बंद किया और नीचे चली गई।

लेकिन उसके मन में वही मैसेज घूम रहा था।

“तुम्हें मुझसे दूर रहना चाहिए…”

खाना खाते समय भी वह बार-बार अपने फोन को देख रही थी।

तभी अचानक फोन फिर से वाइब्रेट हुआ।

उसने धीरे से फोन उठाया।

फिर एक नया मैसेज आया था—

“अगर तुम मेरे करीब आई…

तो तुम्हें सिर्फ खौफ मिलेगा।”

रिया के चेहरे का रंग उड़ गया।

अब उसे यकीन हो गया था कि कोई उसे देख रहा है।

लेकिन क्यों…?

और वो कौन था…?

उसी समय घर के बाहर किसी के कदमों की आवाज आई।

रिया का दिल जोर से धड़कने लगा।

वह धीरे-धीरे खिड़की के पास गई…

और बाहर झाँककर देखा।

सड़क के उस पार…

वही काले कपड़ों वाला लड़का खड़ा था।

वह सीधा रिया की खिड़की की तरफ देख रहा था।

उसकी आँखों में एक अजीब-सी चमक थी।

रिया डर के मारे पीछे हट गई।

उसके होंठ कांप रहे थे।

“ये… ये यहाँ कैसे आ गया…?”

उसने घबराकर कहा।

लेकिन सबसे डरावनी बात अभी बाकी थी।

कुछ ही सेकंड बाद रिया के फोन पर फिर से एक मैसेज आया।

उसने डरते-डरते फोन खोला।

मैसेज में सिर्फ एक लाइन लिखी थी—

“मैंने कहा था ना…

मुझसे दूर रहो।”

रिया के हाथ से फोन गिर गया।

क्योंकि वह जान चुकी थी—

वह लड़का अभी भी बाहर खड़ा था…

और वह उसे देख रहा था।

रिया के हाथ से फोन जमीन पर गिर चुका था।

उसका दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था जैसे अभी बाहर निकल आएगा।

वह धीरे-धीरे खिड़की की तरफ बढ़ी।

डरते-डरते उसने फिर से बाहर देखा…

लेकिन इस बार सड़क खाली थी।

वह लड़का वहाँ नहीं था।

रिया ने राहत की सांस ली, लेकिन उसके मन में डर अभी भी था।

“अभी तो यहीं खड़ा था… इतनी जल्दी कहाँ चला गया…?”

रिया खुद से बोली

अचानक उसके फोन की फिर से वाइब्रेशन हुई।

रिया घबरा गई।

उसने डरते-डरते फोन उठाया।

फिर वही अनोखा मैसेज था—

“मैंने कहा था ना…

मुझे ढूंढने की कोशिश मत करो।”

रिया की आंखें डर से फैल गईं।

उसने तो अभी किसी को ढूंढने की कोशिश भी नहीं की थी।

फिर उसे कैसे पता…?

रिया के दिमाग में एक ही ख्याल आया—

क्या वो लड़का अभी भी आसपास है…?

अचानक बाहर तेज हवा चलने लगी।

पेड़ों की शाखाएँ हिलने लगीं और खिड़की के शीशे कांपने लगे।

रिया ने जल्दी से पर्दा बंद कर दिया।

लेकिन जैसे ही वह मुड़ी…

उसे ऐसा लगा जैसे कोई उसके पीछे खड़ा है।

उसकी सांस रुक गई।

कमरे में सन्नाटा था।

रिया ने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा…

लेकिन वहाँ कोई नहीं था।

“मैं शायद ज्यादा सोच रही हूँ…”

उसने खुद को समझाया।

तभी उसके फोन पर एक और मैसेज आया।

इस बार मैसेज छोटा था—

“रिया…”

रिया का दिल धक से रह गया।

उसे सबसे ज्यादा डर इस बात से लगा कि…

उस अनजान लड़के को उसका नाम भी पता था।

अब रिया के मन में डर के साथ-साथ जिज्ञासा भी पैदा होने लगी।

वह आखिर था कौन…?

और उसे रिया के बारे में इतना सब कैसे पता था…?

रिया ने हिम्मत करके पहली बार उस नंबर पर reply किया।

उसने लिखा—

“तुम कौन हो?”

कुछ सेकंड तक कोई जवाब नहीं आया।

कमरे की घड़ी की टिक-टिक की आवाज साफ सुनाई दे रही थी।

फिर अचानक फोन पर नया मैसेज आया—

“जिससे तुम्हें दूर रहना चाहिए…”

रिया गुस्सा और डर दोनों महसूस कर रही थी।

उसने फिर लिखा—

“अगर तुम मुझे डराना चाहते हो तो ये बंद करो।”

कुछ देर तक कोई जवाब नहीं आया।

रिया ने सोचा शायद अब मैसेज आना बंद हो गए।

लेकिन तभी…

उसके फोन की स्क्रीन अचानक अपने-आप ऑन हो गई।

स्क्रीन पर एक नया मैसेज चमक रहा था—

“मैं तुम्हें डराना नहीं चाहता…

मैं तुम्हें बचाना चाहता हूँ।”

रिया हैरान रह गई।

“बचाना…? किससे…?”

उसने धीरे से कहा।

लेकिन जवाब आने से पहले ही…

बाहर अचानक किसी चीज के गिरने की तेज आवाज आई।

धड़ाम!

रिया घबरा कर खिड़की की तरफ दौड़ी।

उसने धीरे से पर्दा हटाया…

और जैसे ही उसने बाहर देखा—

उसका चेहरा डर से सफेद पड़ गया।

सड़क के बीचों-बीच वही काले कपड़ों वाला लड़का खड़ा था।

लेकिन इस बार उसकी नजरें सीधे रिया पर नहीं थीं…

वह रिया के घर के पीछे अंधेरे में किसी को घूर रहा था।

जैसे वहाँ कोई और भी मौजूद हो।

रिया का दिल तेजी से धड़कने लगा।

उसे महसूस हुआ कि शायद यह कहानी उतनी सरल नहीं है जितनी वह सोच रही थी।

और शायद…

जिससे वह डर रही थी…

वही उसे किसी और बड़े खतरे से बचाने आया था।

लेकिन असली सवाल अभी भी बाकी था—

आखिर वह लड़का था कौन…?

और वह किस खतरे की बात कर रहा था…?

रिया को अभी नहीं पता था कि…

उसकी जिंदगी अब एक ऐसी कहानी में बदलने वाली थी

जहाँ मोहब्बत भी होगी… और खौफ भी।

और यह तो बस शुरुआत थी…

असली खौफ अभी बाकी था।

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